CTET Solved Paper - CTET September 2016 Paper2

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141. सीखने-सिखाने की प्रक्रिया के सन्दर्भ में आप किस कथन से सहमत हैं?

  • Option : A
  • Explanation : सीखने-सिखाने की प्रक्रिया के सन्दर्भ में एक कक्षा में हम जो सीखते हैं, उसके सभी अंश अगली कक्षा के लिए आधार बिन्दु होते हैं | अतः यदि विद्यार्थी ने पूर्व कक्षा में से कुछ नहीं सीखा है, तो अगली कक्षा में सीखते समय उसे अवश्य कठिनाई महसूस होगी |
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142. कक्षा 8 के लिए पाठ्य-पुस्तक का निर्माण करते समय महत्वपूर्ण है

  • Option : B
  • Explanation : कक्षा 8 के लिए पाठ्य-पुस्तक का निर्माण करते समय विधागत विविधता होना महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस आयु के विद्यार्थियों के लिए विभिन्न विधाओं की विविधता होने से उनकी जानकारी बढ़ेगी| साथ ही वे भाषा के रचनात्मक पहलुओं को भी भली-भाँती समझ सकेंगे |
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निर्देश (प्र.सं. 143 -150) नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही/सबसे उचित उत्तर वाले विकल्प को चुनिए |

मेरे मकान के आगे चौराहे पर ढाबे के आगे फुटपाथ पर खाना खाने वाले लोग बैठते हैं- रिक्शेवाले, मजदूर, फेरीवाले, कबाड़ीवाले…| आना-जाना लगा ही रहता है | लोग कहते हैं “आपको बुरा नहीं लगता? लोग सड़क पर गन्दा फैला रहे हैं और आप इन्हें बर्दाश्त कर रहे हैं? इनके कारण पूरे मोहल्ले की आबोहवा खराब हो रही है|” मैं उनकी बातों को हल्के में ही लेता हूँ| मुझे पता है कि यहाँ जो लोग जुटते हैं वे गरीब लोग होते हैं| अपने काम-धाम के बीच रोटी खाने चले आते हैं और खाकर चले जाते हैं| ये आमतौर पर बिहार से आए गरीब ईमानदार लोग हैं जो हमारे इस परिसर के स्थायी सदस्य हो गए हैं| ये उन अशिष्ट अमीरों से भिन्न हैं, जो साधारण-सी बात पर भी हंगामा खड़ा कर देते हैं| लोगों के पास पैसा तो आ गया पर धनी होने का शऊर नहीं आया| अधजल गगरी छलकत जाए की तर्ज पर इनमें दिखावे की भावना उबाल खाती है| असल में यह ढाबा हमें भी अपने माहौल से जोड़ता है| में लेखक हूँ तो क्या हुआ? गाँव के एक सामान्य घर से आया हुआ व्यक्ति हूँ| बचपन में गाँव-घरों की गरीबी देखी है और भोगी भी है| खेतों की मिटटी में रमा हूँ, वह मुझमें रमी है| आज भी उस मिटटी को झाड़झूड़ कर भले ही शहरी बनने की कोशिश करता हूँ, बन नहीं पाता| वह मिटटी बाहर से चाहे न दिखाई दे, अपनी महक और रसमयता से वह मेरे भीतर बसी हुई है| इसीलिए मुझे मिटटी से जुड़े ये तमाम लोग भाते हैं| इस दुनिया में कहा-सुनी होती है, हाथापाई भी हो जाती है लेकिन कोई किसी के प्रति गाँठ नहीं बाँधता| दूसरे-तीसरे ही दिन परस्पर हँसते-बतियाते और एक-दूसरे के दुःख-दर्द में शामिल होते दिखाई पड़ते हैं| ये सभी कभी-न-कभी एक-दूसरे से लड़ चुके हैं लेकिन कभी इसकी प्रतीति नहीं होती कि ये लड़ चुके हैं| कल के गुस्से को अगले दिन धूल की तरह झाड़कर फेंक देते हैं|

143. 'गाँठ बाँधना' का अर्थ है

  • Option : C
  • Explanation : गाँठ बाँधना का अर्थ है - मन में रखना|
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145. 'अधजल गगरी छलकत जाए' किसके सन्दर्भ में कहा गया है?

  • Option : D
  • Explanation : 'अधजल गगरी छलकत जाए' लोकोक्ति का प्रयोग दिए गए गधांश में उन लोगों के सन्दर्भ में कहा है जो अमीर बन गए असभ्य लोग हैं|
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