CTET Solved Paper MCQ - CTET February 2014 Paper1
जीवन में बहुत अंधकार है और अंधकार की ही भाँति अशुभ और अनीति है| कुछ लोग इस अंधकार को स्वीकार कर लेते हैं और तब उनके भीतर जो प्रकाश तक पहुँचने और पाने की आकांक्षा थी, वह क्रमशः क्षीण होती जाती है| मैं अंधकार की इस स्वीकृति को मनुष्य का सबसे बड़ा पाप कहता हूँ| यह मनुष्य का स्वयं अपने प्रति किया गया अपराध है| उसके दूसरों के प्रति किए गए अपराधों का जन्म इस मूल पाप से ही होता है| यह स्मरण रहे कि जो व्यक्ति अपने ही प्रति इस पाप को नहीं करता है, वह किसी के भी प्रति कोई पाप नहीं कर सकता है| किन्तु कुछ लोग अंधकार के स्वीकार से बचने के लिए उसके अस्वीकार में लग जाते हैं| उनका जीवन अंधकार के निषेध का ही सतत उपक्रम बन जाता है|
- A बच्चों की चीजों को परखने, गहराई से जुड़ने और व्यापक अनुभव स्तर से तादाम्य का अवसर देते हैं
- B बच्चों की भाषायी और सांस्कृतिक विविधता को सीमित करते हैं
- C बच्चों को विस्तृत अभ्यास करने और शिक्षकों को बच्चों की भाषा में सुधार करने के तरिके बताते हैं
- D बच्चों का सही-सही आकलन करने में सदैव मदद करते हैं कि वे क्या नहीं जानते?