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CTET Solved Paper MCQ - CTET September 2015

निर्देश (प्र.सं. 121 -129) नीचे दिए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उचित उत्तर वाले विकल्प चुनिए |

‘आदमी की तलाश’, यह स्वर अक्सर सुनने को मिलता है| यह भी सुनने को मिलता है की आज आदमी, आदमी नहीं रहा| इन्हीं स्थितियों के बीच दार्शनिक राधाकृष्णन की इन पक्तियों का स्मरण हो आया “हमने पक्षियों की तरह उड़ना और मछलियों की तरह तैरना तो सीख लिया है, पर मनुष्य की तरह पृथ्वी पर चलना और जीना नहीं सीखा|” जिंदगी के सफर में नैतिक और मानवीय उद्देश्यों के प्रति मन में अटूट विशवास होना जरूरी है| कहा जाता है – आदमी नहीं चलता, उसका विशवास चलता है| आत्मविश्वास सभी गुणों को एक जगह बाँध देता है, यानी कि विशवास की रोशनी में मनुष्य का सम्पूर्ण व्यक्तित्व और आदर्श उजागर होता है| गेटे की प्रसिद्ध उक्ति है कि जब कोई आदमी ठीक काम करता है तो उसे पता तब नहीं चलता कि वह क्या कर रहा है, पर गलत काम करते समय उसे हर क्षण यह ख्याल रहा है कि वह जो कर रहा है, वह गलत है| गलत को गलत मानते हुए भी इंसान गलत किए जा रहा है| इसी कारण समस्याओं एवं अँधेरों के अंबार लगे हैं| लेकिन ऐसा ही नहीं है| कुछ अच्छे लोग भी हैं, शायद उनकी अच्छाइयों के कारण ही जीवन बचा हुआ है| ऐसे लोगों ने नैतिकता और सच्चरित्रता का खिताब ओढ़ा नहीं, उसे जीकर दिखाया|वए भाग्य और नियति के हाथों खिलौना बनकर नहीं बैठे, स्वयं के पसीने से अपना भाग्य लिखा| महात्मा गाँधी ने इसलिए कहा कि हमें वह परिवर्तन खुद बनना चाहिए, जिसे हम संसार में देखना चाहते हैं| जरूरत है कि हम दर्पण जैसा जीवन जीना सीखें| उन सभी खिड़कियों को बंद कर दें, जिनसे आने वाली गन्दी हवा इंसान को इंसान नहीं रहने देती| मनुष्य के व्यवहार में मनुष्यता को देखा जा सके, यही ‘आदमी की तलाश’ है|

Correct AnswerOption D
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गलत या अनुचित कार्य उसे यह अवश्य आभास रहता है, कि जो वह कर रहा है वह ठीक नहीं कर रहा|
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Correct AnswerOption D
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अँधेरों के अम्बार लगते हैं, में अँधेरों का भाव है - बुराइयों के|
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Correct AnswerOption D
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अन्य सभी संज्ञा शब्द (भाववाचक संज्ञाएँ) हैं, जबकि उछलता एक क्रिया शब्द है| अतः यही शेष से भिन्न है |
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Correct AnswerOption B
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'जरूरत है कि हम दर्पण-जैसा जीवन जीना सीखें|' एक मिश्रित वाक्य का उदाहरण है क्योंकि यहाँ 'कि' शब्द का प्रयोग हुआ है|
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निर्देश (प्र.सं. 130-135) नीचे दिए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उचित उत्तर वाले विकल्प चुनिए|

अधिकतर लोगों की यही शिकायत होती है कि उन्हें पनपने के लिए सटीक माहौल व संसाधन नहीं मिल पाए, नहीं तो आज वे काफी आगे होते और आज भी ऐसे कई लोग हैं, जो संसाधन और स्थितियों के अनुकूल होने के इन्तजार में खुद को रोके हुए हैं| ऐसे लोगों के लिए ही किसी विद्वान ने कहा है – इन्तजार मत कीजिए, समय एकदम अनुकूल कभी नहीं होता| जितने संसाधन आपके पास मौजूद हैं उन्हीं से शुरुआत कीजिए और आगे सब बेहतर होता जाएगा| जिनके इरादे दृढ़ होता हैं, वे सीमित संसाधनों में भी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर पाते हैं|
नारायणमूर्ति ने महज दस हजार रूपये में अपने छः दोस्तों के साथ इन्फोसिस की शुरुआत की और आज इन्फोसिस आईटी के क्षेत्र की एक बड़ी कंपनी है| करौली टैक्स, पहले अपने दाएँ हाथ से निशानेबाजी करते थे, मगर उनका वह हाथ एक विस्फोट में चला गया| फिर उन्होंने अपने बाएँ हाथ से शुरुआत की और 1948 व 1950 में ओलम्पिक स्वर्ण पदक अपने नाम किया| लिओनार्दो द विंची, रवीन्द्रनाथ टैगोर, टॉमस अल्वा एडिसन, टेलीफोन के आविष्कारक ग्रैहम बेल, वॉल्ट डिज़्नी- ये सब अपनी शुरूआती उम्र में डिस्लेक्सिया से पीड़ित रह चुके हैं, जिसमे पढ़ने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, फिर भी ये सभी अपने-अपने क्षेत्र के शीर्ष पर पहुँचे| अगर ये लोग भी इसी तरह माहौल और संसाधनों की शिकायत और इन्तजार करते, तो क्या कभी उस मुकाम पर पहुँच पाते, जहाँ वे मौजूद हैं? अगर हमने अपना लक्ष्य तय कर लिया है, तो हमें उस तक पहुँचने की शुरुआत अपने सीमित संसाधनों से ही कर देनी चाहिए| किसी इन्तजार में नहीं रहना चाहिए| ऐसे में इन्तजार करना यह दर्शाता है कि हम अपने लक्ष्य को पाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध नहीं हैं| इसलिए हमें अपनी इच्छशक्ति को मजबूत कर जुट जाना होगा| इन्तजार करेंगे, तो करते रह जाएँगे|

Correct AnswerOption A
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समय एकदम अनुकूल में एकदम का अर्थ है- पूरी तरह से अर्थात पूर्णतः|
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