Explanation : यात्रावृत्त लेखन में महापण्डित राहुल सांकृत्यायन का उच्चतम स्थान है| तिब्बत में सवा वर्ष (1933), मेरी यूरोप यात्रा (1935), मेरी तिब्बत यात्रा (1937), मेरी लद्दाख यात्रा(1939), किन्नर देश में (1948), रूस में पच्चीस मास (1952) इनके महत्वपूर्ण यात्रावृत्त हैं|
Explanation : कभी-कभी कोई वक्ता किसी बात को कहने में बहुत-से शब्दों का प्रयोग करता है और कभी-कभी उसी बात को कम-से-कम शब्दों में कह देता है| कम-से-कम शब्दों में अधिक विचारों की अभिव्यक्ति के लिए वाक्यांशों के लिए एक शब्द का प्रयोग बहुपयोगी होता है| अतः 'किसी बात का गूढ़ रहस्य जानने वाला' वाक्य के लिए एक शब्द मर्मज्ञ होगा|