बालकों के स्वर में आरोह-अवरोह का ऐसा अभ्यास करा दिया जाए कि वे यथावसर भावों के अनुकूल स्वर में लोच देकर पढ़े
बालकों को वाचन के माध्यम से शब्द ध्वनयों का पूर्ण ज्ञान कराया जाता है| वाचन की इस कला से छात्र मुँह व जिव्हा के उचित स्थान से ध्वनि उच्चरित करते रहेंगे
वाचन से अक्षर, उच्चारित ध्वनि, बल, निर्गम, सस्वरता आदि को सम्यक संस्कार प्राप्त होता है
उपरोक्त सभी
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